हनुमानगढ़, राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में चंडीगढ़ स्थित ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा प्रस्तावित अनाज आधारित इथेनॉल प्लांट के खिलाफ पिछले 15 महीनों से चल रहा आंदोलन फिर सुर्खियों में है। ‘फैक्ट्री हटाओ क्षेत्र बचाओ संघर्ष समिति‘ के प्रमुख युवा नेता महंगा सिंह को इथेनॉल फैक्ट्री विरोध से जुड़े मामले में गिरफ्तारी के एक माह बाद गुरुवार शाम को जमानत मिल गई। जमानत मिलते ही टिब्बी के श्री गुरुद्वारा सिंह सभा में उनका जोरदार स्वागत किया गया, जहां बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे।
महंगा सिंह ने स्वागत समारोह में कहा, “इथेनॉल फैक्ट्री हटने तक आंदोलन जारी रहेगा। हम क्षेत्र की जल, वायु और भूमि को प्रदूषण से बचाने के लिए डटे रहेंगे।” उनका यह बयान आंदोलनकारियों में नई ऊर्जा जगाने वाला साबित हुआ।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
टिब्बी के राठीखेड़ा गांव में लगने वाली यह फैक्ट्री एशिया की सबसे बड़ी इथेनॉल इकाइयों में से एक बताई जा रही है, जिसकी लागत करीब 450 करोड़ रुपये है। किसानों का आरोप है कि फैक्ट्री से भारी प्रदूषण होगा, भूजल स्तर गिरेगा और कृषि भूमि बंजर हो जाएगी। नवंबर 2025 में निर्माण कार्य फिर शुरू होने पर आंदोलन उग्र हो गया। 19 नवंबर को पुलिस सुरक्षा में काम शुरू होने पर महंगा सिंह सहित कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया था।
10 दिसंबर को महापंचायत के बाद प्रदर्शन हिंसक हो गया, जहां किसानों ने फैक्ट्री की दीवार तोड़ी और वाहनों में आग लगा दी। पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसमें दर्जनों लोग घायल हुए। इसके बाद इंटरनेट बंदी, धारा 144 और भारी पुलिस बल तैनात किया गया। 17 दिसंबर को हनुमानगढ़ में बड़ी महापंचायत हुई, जिसमें पंजाब-हरियाणा के किसान नेता भी शामिल हुए और 20 दिन का अल्टीमेटम दिया गया।
