theverge
नई दिल्ली – अगर आपका स्मार्टफोन हमेशा जेब में रहता है और लोकेशन ऑन है, तो रुकिए! IIT दिल्ली के ताज़ा शोध ने एक ऐसी सच्चाई उजागर की है, जो आपको रातों की नींद उड़ा सकती है। आपका फोन सिर्फ़ आपकी लोकेशन ही नहीं ट्रैक करता, बल्कि आपकी ज़िंदगी की हर छोटी-बड़ी डिटेल – कहाँ जा रहे हैं, किससे मिल रहे हैं, घर में कहाँ बैठते हैं – सब कुछ रिकॉर्ड कर रहा है। और ये डेटा ? किसी अनजान सर्वर तक पहुँच रहा है!
GPS अब सिर्फ़ नक्शा नहीं, आपकी पूरी डायरी है
IIT दिल्ली की प्रोफ़ेसर डॉ. स्मृति रंजन सारंगी बताते हैं, “पहले GPS को एक जगह पता करने के लिए 4 सैटेलाइट चाहिए होते थे। अब 10-12 सैटेलाइट मिलकर 32 पैरामीटर्स पर डेटा भेजते हैं।” इसका मतलब?
- आप खड़े हैं, बैठे हैं या लेटे हैं – ये भी पता चल जाता है।
- आप भीड़ में हैं या अकेले – वो भी ट्रैक।
- यहाँ तक कि आपके घर का लेआउट और साइज़ तक का अंदाज़ा लग जाता है!
शोध में पाया गया: 87% सटीकता से GPS आपकी हर गतिविधि को पहचान लेता है। यानी, आप सुबह 7 बजे घर से निकले, ऑफिस के रास्ते में कॉफ़ी शॉप रुके, दोपहर में बॉस से मिले – सब कुछ किसी को पता चल सकता है।
आपका “डिजिटल फिंगरप्रिंट” बिक रहा है?
हर बार जब आप कोई ऐप डाउनलोड करते हैं और “Allow Location” दबाते हैं, आप अनजाने में अपना डिजिटल हस्ताक्षर दे देते हैं। ये डेटा:
- आपकी रोज़ की रूटीन को मैप कर देता है।
- बताता है आप किन लोगों से मिलते हैं।
- यहाँ तक कि संवेदनशील जगहों (जैसे अस्पताल, कोर्ट, प्रोटेस्ट) पर जाने की जानकारी भी लीक हो सकती है।
डरावनी सच्चाई: कभी सोचा कि आपने किसी से “नई कार” की बात की और 10 मिनट बाद कार का ऐड आ गया? ये कोई जादू नहीं – आपका फोन बैकग्राउंड में सुन रहा है!
“डिजिटल गिरफ्तारी” का खतरा
डॉ. सारंगी चेतावनी देते हैं – ये डेटा सिर्फ़ विज्ञापनों के लिए नहीं, निगरानी के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है। सरकारें, हैकर्स या कॉर्पोरेट – कोई भी आपकी ज़िंदगी की स्क्रिप्ट लिख सकता है।
आप अभी क्या कर सकते हैं? (5 आसान स्टेप्स)
- लोकेशन ऑलवेज ऑन तुरंत बंद करें! → सिर्फ़ ऐप यूज़ करते वक़्त “While Using the App” चुनें।
- बैकग्राउंड ट्रैकिंग चेक करें → Settings > Privacy > Location Services → हर ऐप की परमिशन देखें।
- माइक्रोफ़ोन भी बंद रखें → ज़रूरी न हो तो “Never” सिलेक्ट करें।
- संवेदनशील जगह पर फोन बाहर छोड़ें → प्रोटेस्ट, मीटिंग, डॉक्टर के पास फोन घर पर!
- रूटीन बदलते रहें → एक ही रास्ता, एक ही टाइम GPS को कन्फ्यूज़ करें!
आखिरी बात: स्मार्टफोन है, पर स्मार्ट बनिए आप
GPS ने दुनिया को छोटा बनाया, लेकिन गलत हाथों में ये हथियार भी बन सकता है। स्मार्ट होना मतलब फोन चलाना नहीं – उससे स्मार्ट बनना है।
अगली बार जब कोई ऐप लोकेशन माँगे, सोचिए – क्या ये सच में ज़रूरी है?
सावधान रहें। सुरक्षित रहें। अपनी प्राइवेसी खुद बचाएँ।
